चुनाव आते ही राजनीतिक पार्टियां वोटरों को लुभाने के लिए बड़े-बड़े वादे कर देती हैं। अगर राजनीतिक भाषा की ओर जाएं तो चुनाव से पहले किए जाने वाले लोक-लुभावन वादों को में फ्रीबीज या रेवड़ी कल्चर कहा जाता है। बीते कुछ सालों में देश में फ्रीबीज का एक कंपटीशन शुरु हो गया है और जनता को भी रेवड़ी का स्वाद लग चुका है। लेकिन कुछ समय के लिए मिठी लगने वाली ये रेवड़ी का असली स्वाद काफी कड़वा है। इस मुफ्त रेवड़ी के बोझ को अब कई सरकारों के लिए उठाना मुश्किल होता जा रहा है