Akhilesh Yadav News: उत्तर प्रदेश में 10 में से 9 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव कराए गए। हालांकि तब मिल्कीपुरी सीट से चुनाव नहीं हो पाया था। अब यहां उपचुनाव का रास्ता साफ हो गया है। इसके बाद अखिलेश ने यहां विदेशी मीडिया को भी निमंत्रित कर दिया है। उन्होंने कहा कि उन्हें आकर देखना चाहिए कि मिल्कीपुर में कितने निष्पक्ष रूप से चुनाव होगा।
दरअसल, इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने मिल्कीपुर उपचुनाव को लेकर दाखिल याचिका वापस लेने की मंजूरी दे दी। इसके बाद अयोध्या की मिल्कीपुर विधानसभा सीट पर उपचुनाव का रास्ता क्लियर हो गया। यहां BJP और समाजवादी पार्टी के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिल सकती है।
‘आएं और देखें कितना निष्पक्ष होगा चुनाव’
मिल्कीपुर उपचुनाव को लेकर रास्ता साफ होने पर अखिलेश यादव ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि इस चुनाव के लिए मैं पूरे देश और विदेश की मीडिया को निमंत्रण देता हूं कि वह आए देखें कि कितना निष्पक्ष रूप से चुनाव होगा।
जान लें कि लोकसभा चुनाव 2024 में अवधेश प्रसाद के फैजाबाद से जीतकर सांसद बन गए थे। उन्होंने मिल्कीपुर सीट से इस्तीफा दे दिया और यह सीट खाली हो गई थी। लेकिन कोर्ट में याचिका लंबित होने की वजह से राज्य की अन्य विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनाव के साथ मिल्कीपुर में चुनाव नहीं कराया जा सका। अब हाईकोर्ट से याचिका वापस लेने की इजाजत मिलने के बाद मिल्कीपुर विधानसभा सीट पर उपचुनाव का रास्ता साफ हो गया है।
क्यों अहम है मिल्कीपुर सीट?
गौरतलब है कि यह सीट BJP और समाजवादी पार्टी दोनों के लिए बेहद अहम मानी जा रही है। मिल्कीपुर सीट, अयोध्या संसदीय क्षेत्र में आती है। BJP इस सीट से चुनाव जीतकर यह संदेश देना चाहेगी कि लोकसभा चुनाव में फैजाबाद सीट गंवाने के बाद भी अयोध्या पर उसकी पकड़ कमजोर नहीं हुई। वहीं सपा भी इस सीट को कतई नहीं गंवाना चाहेगी।
जान लें कि सपा ने मिल्कीपुर से अवधेश प्रसाद के बेटे अजित प्रसाद को उम्मीदवार बनाया है। वहीं, BSP ने भी अपने उम्मीदवार का ऐलान कर दिया, लेकिन BJP ने अबतक अपने पत्ते नहीं खोले हैं। 2022 के चुनाव में मिल्कीपुर से सपा के अवधेश प्रसाद की जीत हुई थी।
संभल हिंसा को लेकर अखिलेश का सरकार पर निशाना
इस दौरान सपा प्रमुख संभल हिंसा को लेकर सरकार और पुलिस-प्रशासन को घेरते नजर आए। उन्होंने कहा कि नाकामी को छिपाने के लिए दंगा कराया गया। सर्वे की बात थी तो पहले दिन किसी को आपत्ति नहीं थी। अगर कोई जिम्मेदार है तो प्रशासन जिम्मेदार है। अगर होर्डिंग और फोटो ये सब लगाना है तो उन लोगों के भी फोटो जारी करें जो सर्वे टीम के साथ नारेबाजी कर रहे थे। ये दिल्ली और लखनऊ की लड़ाई है। अब राजधर्म कौन किसको याद दिलाएगा ये बड़ी बात है… लखनऊ वाले या दिल्ली वाले।
अखिलेश यादव ने पूछा कि क्या सरकार उन पर भी गंभीर धारा लगाएगी जो सर्वे टीम के साथ नारेबाजी कर रहे थे। उन्होंने कहा कि अधिकारियों का बैकग्राउंड देखिए, आज वो कठपुतली बनकर सरकार का काम कर रहे हैं। वो न्याय नहीं दे रहे हैं।
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