ताजमहल को मुगल वास्तुकला का बेहतरीन शाहकार माना जाता है। यह अद्भुत कृति पर्शियन (ईरानी), इस्लामिक, भारतीय और मध्य एशियाई शैलियों का एक अद्भुत मिश्रण है। इसमें पर्शियन प्रभाव सबसे ज्यादा दिखाई देता है। इसे बनाने में 20000 से अधिक कारीगरों और मजदूरों ने काम किया था। इसका निर्माण 1632 से शुरू होकर 1648-1653 के बीच पूरा हुआ था