(खबरें अब आसान भाषा में)
युद्ध की आंच में झुलस रहे सूडान में, स्थानीय समुदायों का कहना है कि देश की सीमाओं के भीतर विस्थापित हुए लोगों के आश्रय के लिए पर्याप्त शिविर नहीं हैं. यौन हिंसा की पीड़ा झेलने वाली महिलाओं की मदद के लिए उपाय नहीं हैं, और विकलांगजन के लिए भी सहायता का अभाव है.