मंगलवार (5 नवंबर) को सुप्रीम कोर्ट ने मदरसा एक्ट को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को खारिज कर दिया। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने ये भी कहा है कि मदरसा एक्ट संविधान के खिलाफ नहीं है। इलाहाबाद हाईकोर्ट का मदरसा एक्ट पर फैसला सही नहीं था। सुप्रीम कोर्ट ने मदरसा एक्ट को बरकरार रखने का फैसला सुनाया है। इस फैसले से सूबे की योगी सरकार को झटका लगा तो एआइएमआइएम चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने भी इस फैसले के बाद अपनी बात रखी है। हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने यूपी के सीएम योगी से बड़ी मांग कर डाली है।
एआइएमआइएम के मुखिया असदुद्दीन ओवैसी ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा उत्तर प्रदेश के मदरसा अधिनियम को संवैधानिक क़रार दिए जाने के बाद सोशल मीडिया पर लिखा कि उत्तर प्रदेश के मदरसा अधिनियम को आज सुप्रीम कोर्ट ने संवैधानिक क़रार दिया। योगी सरकार की लगातार कोशिश रही है कि मदरसों को बदनाम किया जाए और उन्हें ग़ैर-क़ानूनी कहा जाए। इसके अलावा ओवैसी ने इस दौरान मदरसे में पढ़ाने वाले शिक्षकों के वेतन को लेकर योगी सरकार से मांग कर दी है।
21 हजार मदरसों में पढ़ाने वाले शिक्षकों का वेतन दे योगी सरकारः ओवैसी
असदुद्दीन ओवैसी ने अपने एक्स प्लेटफॉर्म पर लिखा, ‘उत्तर प्रदेश के मदरसा अधिनियम को आज सुप्रीम कोर्ट ने संवैधानिक क़रार दिया। योगी सरकार की लगातार कोशिश रही है कि मदरसों को बदनाम किया जाए और उन्हें ग़ैर-क़ानूनी कहा जाए। योगी सरकार की लगातार कोशिश रही है कि मदरसों को बदनाम किया जाए और उन्हें ग़ैर-क़ानूनी कहा जाए। शायद इसलिए क्योंकि यूपी सरकार ने 21,000 मदरसों में पढ़ाने वाले शिक्षकों को उनकी तनख़्वाह नहीं दी है। ये शिक्षक दीनी तालीम नहीं, बल्कि विज्ञान, गणित वगैरह पढ़ाते थे। 2022-23 तक ₹1,628.46 करोड़ की तनख़्वाह बकाया थी। उम्मीद है कि अब जल्द से जल्द बकाया राशि का भुगतान कर दिया जाएगा।’
मार्च 2024 में हाईकोर्ट ने रद्द कर दिया था मदरसा बोर्ड एक्ट
इसके पहले मार्च 2024 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मदरसा बोर्ड एक्ट को असंवैधानिक बताते हुए रद्द कर दिया था। 5 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के इस फैसले की सुनवाई की जिस पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने इसे गलत फैसला करार दिया। इसके पहले 22 अक्टूबर को हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। इसके पहले 22 मार्च को इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने इस मामले में सुनवाई करते हुए यूपी मदरसा बोर्ड एक्ट को असंवैधानिक बताते हुए वहां पढ़ने वाले सभी छात्रों का एडमिशन सामान्य स्कूलों में करवाने का आदेश दिया था। इस फैसले से लगभग 22 लाख छात्रों का भविष्य अधर में लटका था अब उन्हें भी राहत मिल गई है।