विश्व के 16 देशों व क्षेत्रों में एक विशाल आबादी के पास पेट भरने के लिए पर्याप्त भोजन नहीं है और उनके अकाल के गर्त में धँसने का जोखिम गहराता जा रहा है. हिंसक टकराव, आर्थिक उथलपुथल, चरम मौसम घटनाओं – बाढ़, सूखे, तूफ़ान – और सहायता धनराशि की क़िल्लत से, खाद्य असुरक्षा संकट और गम्भीर रूप धारण कर रहा है. जबकि व्यापक स्तर पर भुखमरी को टालने के लिए समय हाथ से फिसला जा रहा है.