“मैं अपने बेटे को भूख से बिलबिलाते हुए बेबस देख रही थी. मेरे पास इस बेकसी में रोने के अलावा और कोई चारा नहीं था, और मैंने अपने बेटे को अपनी भूख मिटाने के लिए, हमारे पास बहुत थोड़े से बचे-खुचे पानी में से चन्द घूँट पीने के लिए कहा.” ग़ाज़ा पट्टी की की एक बेसहारा और बेबस माँ ज़ीनत ने अपनी व्यथा, यूएन न्यूज़ से बात करते हुए, कुछ इन्हीं शब्दों बयान की.