बिहार के पूर्णिया ज़िले के कस्तूरबा गाँधी बालिका विद्यालयों में समावेशन का अर्थ सिर्फ़ मदद करना नहीं, बल्कि वास्तविक मायनों में सुनना है. यहाँ कक्षा 6 से 8 की क़रीब 75 बधिर किशोरियाँ, मुख्यधारा के आवासीय स्कूलों में रहकर, पढ़ना, गणित और सांकेतिक भाषा सीख रही हैं. संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (यूनीसेफ़) और स्थानीय साझेदारों की इस पहल ने यह दर्शाया है कि जब शिक्षा सबकी पहुँच में हो, तो हर लड़की आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ सकती है.