वर्ष 1994 में रवांडा में तुत्सी समुदाय के ख़िलाफ़ हुए जनसंहार पर अन्तरराष्ट्रीय चिन्तन दिवस (7 अप्रैल) के अवसर पर नई दिल्ली में आयोजित एक श्रद्धाँजलि कार्यक्रम में, राजनयिकों, अधिकारियों और छात्रों ने पीड़ितों को याद किया, एक भुक्तभोगी की आपबीती सुनी, और तबाही से एकजुटता तक की रवांडा की यात्रा पर चर्चा की.