भारत में लम्बे समय से पारा (mercury) स्वास्थ्य देखभाल का हिस्सा रहा है और इसका उपयोग थर्मामीटर, रक्तचाप मापने समेत अन्य चिकित्सा उपकरणों में किया जाता रहा है. मगर, अब देश धीरे-धीरे पारा-मुक्त स्वास्थ्य प्रणाली की ओर बढ़ रहा है, क्योंकि यह पदार्थ मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण दोनों के लिए एक गम्भीर ख़तरा माना जाता है.