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तेज़ी से बढ़ते शहरीकरण के बीच महाराष्ट्र का पिंपरी-चिंचवड़ इलाक़ा दिखा रहा है कि असली विकास वही है जिसमें कोई पीछे नहीं छूटे. निकिता की कहानी बताती है कि जब प्रशासन संवेदनशीलता और समझदारी के साथ काम करता है तो समावेशी शासन वास्तविकता बन सकता है.