भारत के ओडिशा राज्य के तटीय क्षेत्र में रहने वाली 25 वर्षीय रेहाना ख़ातून अपने समुदाय में जलवायु परिवर्तन से निपटने की दिशा में अहम भूमिका निभा रही हैं. रीढ़ की हड्डी से जुड़ी बीमारी के साथ अपना जीवन गुज़ार रही रेहाना, किसानों को जलवायु-अनुकूल खेती अपनाने में मदद कर रही हैं और साथ ही लैंगिक भेदभाव व विकलांगता से जुड़े रूढ़िवादी विचारों को चुनौती दे रही हैं. संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) की एक परियोजना के तहत वह अपने क्षेत्र में सामुदायिक ‘जलवायु चैम्पियन’ के रूप में जानी जाती हैं.