समय आ गया है कि भारत खेलों को सिर्फ मनोरंजन के रूप में न देखे, बल्कि इसे प्रीवेन्टिव हेल्थकेयर का अभिन्न हिस्सा माने। भारत की 52 बिलियन डॉलर की स्पोर्ट्स इकोनोमी तेज़ी से बढ़ रही है- इसे प्रीवेन्टिव हेल्थकेयर एवं सार्वजनिक स्वास्थ्य में शामिल करना देश की सबसे बढ़ी जीत होगी। कल्पना कीजिए कि भारत की हेल्थकेयर की यात्रा एक रैकेट, एक बॉल और एक जोड़ी रनिंग शूज़ से शुरू होती है