11 साल की पल्लवी ताम्रकार हर सुबह की तरह दाँत ब्रश करती है, अपना स्कूल बैग तैयार करती है और फिर शान्त मन से अपने हाथ पर इंसुलिन की सुई लगाती है. कभी ऐसा भी था कि पल्लवी को यह सुई लगाने से डर लगता था, मगर अब यह सुई उसकी हिम्मत की पहचान है – आत्मनिर्भरता, साहस और एक नन्ही बच्ची के बड़े सपनों व उम्मीदों की पहचान.