(खबरें अब आसान भाषा में)
आरबीआई ने करीब दो साल तक रेपो रेट 6.5 फीसदी पर बनाए रखने के बाद इस साल फरवरी में इंटरेस्ट रेट में कमी की। उसने एनबीएफसी को लोन देने वाले बैंकों के लिए बढ़ाए गए रिस्क वेटेज को भी वापस ले लिया। इससे फंड की कॉस्ट में कमी आई है और एनबीएफसी के मार्जिन में इम्प्रूवमेंट दिखा है