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बीकानेर की एक तीरंदाज खिलाड़ी की कहानी कई लोगों के लिए प्रेरणा है. छह माह की लगातार प्रैक्टिस से संध्या ने मेडल जीता है. संध्या के एक हाथ नहीं हैं, लेकिन वह अपने मुंह से तीर को छोड़कर निशाना लगाती हैं.