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गुरुवार को संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में आतंकी हमलों से बचे लोगों ने साथ जुटकर, अपनी आपबीती साझा की. उन्होंने कहा कि भविष्य में ऐसे हमलों को रोकने की नीतियों और प्रयासों में उनकी आवाज़ को नज़रअन्दाज़ नहीं किया जाना चाहिए.