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2025 में दालों के बाजार में स्थिरता उपभोक्ताओं और किसानों दोनों के लिए सुखद संकेत है। उत्पादन, आयात नीति और सरकारी हस्तक्षेप के चलते कीमतें संतुलित रहने की उम्मीद है। आने वाले वर्षों में अगर यही रफ्तार बनी रही, तो भारत दालों के मामले में आत्मनिर्भरता की ओर और तेजी से बढ़ सकता है