41 वर्षीय महिला ने फरवरी 2020 में मजिस्ट्रेट के फैसले को चुनौती दी थी, जिसमें उसे घरेलू हिंसा से महिलाओं के संरक्षण अधिनियम के तहत मुआवजा दिया गया था। महिला ने आरोप लगाया कि शादी के बाद से ही उसके पति और ससुराल वालों ने उसके साथ शारीरिक, मानसिक और आर्थिक प्रताड़ता दिए । अदालत ने माना कि वह करीब दो दशकों तक मारपीट, अपमान और आर्थिक तंगी झेलती रही और अंत में उसे कानून की मदद लेनी पड़ी