नेपाल में जलवायु परिवर्तन अब बच्चों के लिए कोई दूर भविष्य की चेतावनी नहीं, बल्कि कुछ हद तक दैनिक जीवन की एक वास्तविकता बन चुका है. पहाड़ी गाँवों में मूसलाधार बारिश, भूस्खलन की वजह से घर, खेत और सड़कें तहस-नहस हो जाती हैं और बच्चे इनसे सबसे अधिक प्रभावित होते हैं. नेपाल में संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (यूनीसेफ़) की स्थानीय प्रतिनिधि एलिस अकुंगा ने यूएन न्यूज़ को बताया कि, “यह बच्चों के कंधों पर एक भारी बोझ है,” और इसलिए जलवायु समाधानों के केन्द्र में उनकी भागेदारी ज़रूरी है. उन्हें परिवर्तन के वाहक के रूप में सशक्त बनाया जाना होगा, ताकि वे अपने भविष्य की रक्षा करने के साथ-साथ उसे आकार भी दे सकें. (वीडियो)…