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इन कंपनियों पर आरोप ये है कि इन्होनें कंपनियों ने पूरे देश में यूनीफार्म तरीके से हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम बढ़ाया है। यह एक तरह से कॉर्टेलाइजेशन था। इसके अलावा इनका क्लेम रिजेक्शन भी काफी ज्यादा है। प्रीमियम बढ़ोतरी और क्लेम रिजेक्शन दोनों 30 फीसदी के आसपास है