उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि दहेज मृत्यु एक ‘‘गंभीर सामाजिक चिंता’’ बनी हुई है और अदालतों का यह कर्तव्य है कि वे ऐसे मामलों में जमानत दिए जाने की परिस्थितियों की गहराई से पड़ताल करें।न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने कहा कि