विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र के स्वास्थ्य मंत्रियों ने ‘दिली घोषणापत्र’ को मंज़ूरी दी है. इसके तहत स्वास्थ्यकर्मियों की क्षमता मज़बूत करने और ख़ासतौर पर ग्रामीण, दूरदराज़ व वंचित इलाक़ों में लोगों तक गुणवत्तापूर्ण विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाएँ पहुँचाने का संकल्प लिया गया है.
तिमोर-लेस्ते की राजधानी दिली में WHO दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्रीय समिति के 79वें सत्र में अपनाए गए इस घोषणापत्र में कहा गया है कि क्षेत्र में स्वास्थ्यकर्मियों की संख्या बढ़ाने में उल्लेखनीय प्रगति हुई है, लेकिन विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाओं तक पहुँच अब भी असमान बनी हुई है.
विशेषज्ञ चिकित्सक (Specialists) अक्सर शहरों, बड़े अस्पतालों और निजी स्वास्थ्य संस्थानों में केन्द्रित रहते हैं. इससे निर्धन, ग्रामीण और दूरदराज़ इलाक़ों में रहने वाले लोगों को विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाएँ आसानी से नहीं मिल पातीं.
WHO दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र के प्रभारी अधिकारी डॉक्टर नीलेश बुद्ध ने कहा, “हमारी चुनौती केवल अधिक स्वास्थ्यकर्मी तैयार करना नहीं है. हमें यह सुनिश्चित करना है कि सही कौशल सही जगह पर उपलब्ध हों और लोगों की स्वास्थ्य ज़रूरतों को पूरा करें.”
घोषणापत्र में देशों से स्वास्थ्य कार्यबल की योजना, शिक्षा और वित्तीय सहायता को मौजूदा व भविष्य की स्वास्थ्य ज़रूरतों के अनुरूप बनाने का आहवान किया गया है.
साथ ही, वंचित इलाक़ों में विशेषज्ञों की भर्ती, तैनाती और उन्हें वहाँ बनाए रखने के लिए मज़बूत नीतियाँ अपनाने पर ज़ोर दिया गया है.
मौजूदा स्वास्थ्यकर्मियों का बेहतर इस्तेमाल करने के लिए बहुविषयक टीमों, काम के बँटवारे, पारिवारिक चिकित्सा, विशेषज्ञ सेवाओं की पहुँच बढ़ाने और रैफ़रल व्यवस्था को मज़बूत करने की बात भी कही गई है.
सदस्य देशों ने टैलीमेडिसिन, टैलीपरामर्श, टैलीरेडियोलॉजी, टैलीपैथोलॉजी, इलैक्ट्रॉनिक रैफ़रल प्रणालियों और AI आधारित चिकित्सकीय उपकरणों के सुरक्षित, समान और विनियमित इस्तेमाल को बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताई है.
डॉक्टर नीलेश बुद्ध ने कहा, “नवाचार का उद्देश्य गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच बढ़ाना होना चाहिए, न कि वंचित समुदायों के लिए निम्न स्तर की सेवाएँ उपलब्ध कराना.”
घोषणापत्र में कैंसर, हृदय रोग, ट्रॉमा, मातृ एवं नवजात देखभाल, मानसिक स्वास्थ्य, वृद्धजन देखभाल, पुनर्वास और दीर्घकालिक देखभाल जैसी विशेषज्ञ सेवाओं के लिए राष्ट्रीय क्षमता मज़बूत करने पर भी ज़ोर दिया गया है.
देशों ने सूचना के आदान-प्रदान, संयुक्त विशेषज्ञ प्रशिक्षण, चिकित्सकीय मार्गदर्शन, पेशेवर आदान-प्रदान और टैलीमेडिसिन के ज़रिए क्षेत्रीय सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति जताई है.
घोषणापत्र में स्वास्थ्य पेशेवरों के नियामकों और नीति निर्माताओं का एक क्षेत्रीय नेटवर्क स्थापित करने का प्रस्ताव भी रखा गया है.
साथ ही कहा गया है कि सभी लोगों तक विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाएँ पहुँचाने के लिए मज़बूत प्राथमिक स्वास्थ्य व्यवस्था भी ज़रूरी है. डॉक्टर नीलेश बुद्ध ने कहा, “मज़बूत प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल और विशेषज्ञ सेवाओं तक समान पहुँच, दोनों ज़रूरी हैं. ये एक ही स्वास्थ्य प्रणाली के परस्पर जुड़े हिस्से हैं.”
उन्होंने कहा कि असली सफलता इस बात से तय होगी कि लोग जहाँ भी रहते हों, ज़रूरत पड़ने पर उन्हें गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा मिल सके.