(खबरें अब आसान भाषा में)
पहले ‘विश्व हिमनद दिवस’ पर संयुक्त राष्ट्र के जलवायु विशेषज्ञों ने आगाह किया है कि अगर ग्लेशियरों का पिघलना इसी दर से जारी रहा तो कई क्षेत्रों में 21वीं सदी पूरी होने से पहले ही वो ख़त्म हो जाएँगे. निचले क्षेत्रों में रहने वाले करोड़ों लोगों के लिए इसके परिणाम विनाशकारी होने की सम्भावना है.