एक ऐसे समय जब दुनिया बढ़ते वैश्विक तापमान और गहन रूप धारण कर रहे जलवायु प्रभावों से जूझ रही है, विकासशील देशों के पास बाढ़, सूखा, तूफ़ान जैसी चरम मौसम घटनाओं से बचाव के लिए पर्याप्त वित्तीय संसाधन उपलब्ध नहीं हैं. संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) ने आगाह किया है कि इन परिस्थितियों में ज़िन्दगियों, आजीविकाओं और अर्थव्यवस्थाओं के लिए जोखिम गहरा रहे हैं.