Mahmood Madani : मदनी ने कहा कि समाज और मीडिया में जिहाद को जिस रूप में दिखाया जा रहा है, वह पूरी तरह भ्रामक है। उन्होंने केंद्र और मीडिया पर आरोप लगाया कि वे एक पवित्र अवधारणा को गलत दिशा में पेश कर रहे हैं। “लव जिहाद”, “थूक जिहाद” और “लैंड जिहाद” जैसे शब्दों को उन्होंने जिहाद के असली अर्थ से बिल्कुल अलग बताया