शिकायत में सिर्फ धान की कमी की बात नहीं है, बल्कि पूरे तंत्र को कटघरे में खड़ा किया गया है। आरोप है कि धान के आने-जाने के फर्जी रिकॉर्ड बनाए गए, खरीदी के नाम पर नकली बिल दिखाए गए, मजदूरों की झूठी हाजिरी भरी गई और सबसे चौंकाने वाली बात यह कि कई अहम समय पर CCTV कैमरे बंद कर दिए गए, ताकि सच्चाई सामने न आ सके