(खबरें अब आसान भाषा में)
आलम ये है कि जहां एक तरफ पाकिस्तान UAE से लिए गए 2.5 अरब डॉलर के कर्ज को चुकाने और IMF को खुश रखने की कोशिश कर रहा है, तो वहीं दूसरी तरफ शांति का वादा करने वाले एक बोर्ड का स्थायी सदस्य बनने के लिए करीब 1 अरब डॉलर भी खर्च कर रहा है