गाजियाबाद के रहने वाले हरीश राणा और उनके माता-पिता की चर्चा आज देश में हर एक व्यक्ति के जुबान पर है। इस परिवार ने 13 सालों से जो दर्द झेला है अब वो मुक्ति के कगार पहुंच गया है। सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के बाद राजनगर एक्सटेंशन निवासी 32 साल के हरीश राणा के पैसिव इच्छामृत्यु