सुप्रीम कोर्ट ने जीवनरक्षक दवाओं के लिए मौजूद प्राइस-कंट्रोल मैकेनिज्म को लेकर भी सवाल उठाए। जिसमें जरूरी दवाओं की कीमतों को नियंत्रित करके मरीजों को इलाज के लिए जरूरत से ज्यादा आर्थिक बोझ न उठाना पड़े, इसपर ध्यान दिया जाए। कैंसर का इलाज कई बार लंबे समय तक चलता है और इस दौरान दवाओं का खर्च भी लगातार जुड़ता रहता है। अगर जरूरी दवाएं महंगी हों, तो मरीज के परिवार पर आर्थिक बोझ और बढ़ सकता है। इसलिए दवाओं की कीमत में उचित अंतर और सही व्यवस्था होना जरूरी है, ताकि इलाज का खर्च मरीजों के लिए ज्यादा मुश्किल न बने।