विश्व भर में जल संसाधन जलवायु परिवर्तन के गहरे दबाव से जूझ रहे हैं, और देशों व समुदायों को या तो अत्यधिक मात्रा में जल प्रवाह या फिर उसकी भीषण क़िल्लत का सामना करना पड़ रहा है. ग्लेशियर क्षेत्रों में यह लगातार तीसरा वर्ष है जब व्यापक पैमाने पर हिमनदों का पिघलना जारी रहा. वहीं, पिछले वर्ष केवल एक-तिहाई नदी बेसिन क्षेत्रों में ही जल प्रवाह की सामान्य परिस्थितियाँ दर्ज की गई.