विश्व भर में, डिजिटल टैक्नॉलॉजी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और अन्य तकनीकों के इस्तेमाल में उछाल आया है, मगर उसके साथ ही, इन माध्यमों पर नफ़रत फैलाने वाले सन्देशों व भाषणों (Hate Speech) का प्रभाव भी कई गुना गहरा हो गया है. संयुक्त राष्ट्र ने निरन्तर आगाह किया है कि असली नज़र आने झूठे (deepfake) वीडियो, सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म्स पर साझा की जाने वाली भ्रामक जानकारी, और भेदभाव को बढ़ावा देने वाले सन्देशों से समाजों में दरारें पैदा हो रही हैं, कमज़ोर समुदायों को निशाना बनाया जा रहा है और आपसी टकराव को हवा देने की भी कोशिशें हो रही हैं.