एक नई ज़िन्दगी का सपना, एक अच्छे कामकाज या रोज़गार का वादा और एक सुरक्षित भविष्य की उम्मीद…ये सब कुछ बहुत सामान्य और ऐसा लगा जिस पर भरोसा किया जा सके. मगर दुर्भाग्य से, हुआ कुछ और! जब मारिया* ने त्रिनिदाद के एक समुद्र तट पर पैर रखे, तो उनका सामना उस कड़वी वास्तविकता से हुआ, जिसकी उन्होंंने कभी कल्पना भी नहीं की थी. उन्हें उम्मीद की जगह मिला भय, आज़ादी की जगह क़ैद, और एक नई शुरुआत की जगह, एक ऐसा अँधेरा, जिसने सालों तक उनका पीछा नहीं छोड़ा.