विकासशील देश, अब क़र्ज़ सम्बन्धी वार्ताओं में अपनी आवाज़ को मज़बूती मिलने की उम्मीद कर रहे हैं. दरअसल, अन्तराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) – विश्व बैंक के वार्षिक वसन्त सत्र के दौरान, बुधवार को एक नई पहल शुरू की गई है, जोकि ज्ञान के आदान-प्रदान, बेहतर समन्वय और ऋण से जुड़े विषयों पर सामूहिक रुख़ को बढ़ावा देने पर केन्द्रित है.