शुरुआत में भारत के लिए दोनों देशों को साधना आसान नहीं था। खुद विदेश मंत्री एस जयशंकर ने उस दौरान कम से कम 3 बार अपने ईरानी समकक्ष से फोन पर बात की। इसके बाद भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजेशकियन से बात की। इन्हीं बातचीत में होर्मुज का रास्ता निकला। नई दिल्ली में ईरान के राजदूत ने भी इसमें अहम भूमिका निभाई