(खबरें अब आसान भाषा में)
कागज पर देखा जाए तो यह कदम अमेरिका को फिर से पाकिस्तान के प्रभाव क्षेत्र में खींचने और बीजिंग पर बढ़ती निर्भरता को संतुलित करने की एक साहसिक रणनीति लगती है। लेकिन हकीकत में यह कमजोर शासन का एक हताश जुआ है, जो चीन को नाराज करने का खतरा उठाता है, पाकिस्तान की लगातार बनी अस्थिरता को नजरअंदाज करता है