घर जैसी कोई जगह नहीं है, जहाँ हमें अपनेपन, सुकून और सुरक्षा का एहसास होता है. लेकिन एक ऐसी दुनिया में जहाँ बाढ़, भीषण गर्मी और अन्य जोखिमों का प्रकोप बढ़ता जा रहा है, वहाँ घर अक्सर इन आपदाओं से सबसे पहले प्रभावित होने वाले स्थान भी बन जाते हैं.
इसी को ध्यान में रखते हुए, मंगलवार, 13 अक्टूबर, को ‘अन्तरराष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण दिवस’ के अवसर पर यह ध्यान दिलाया जा रहा है कि आपदाओं से निपटने की सुदृढ़ तैयारी, घरों से ही शुरू होती है.
सन्देश स्पष्ट है: हर एक व्यक्ति एक सुरक्षित, अपनी सामर्थ्य के अनुसार एक ऐसे घर का हक़दार है, जोकि ऐसे जोखिमों का सामना करने में सक्षम हो.
आपदा जोखिम में कमी लाने के लिए प्रयासरत यूएन संस्था (UNDRR) के अनुसार, घरों को सुरक्षित बनाने के लिए हर किसी की भागेदारी की आवश्यकता है: देशों की सरकारों द्वारा ठोस योजनाओं से लेकर निर्माण के लिए मानक तय किए जाने और स्थानीय स्तर पर निर्णय प्रक्रिया में समुदायों की भूमिका तक.
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने इस दिवस पर अपने सन्देश में ध्यान दिलाया कि घरों की योजना, उनका निर्माण व रखरखाव यह तय कर सकता है कि उनमें लोग सुरक्षित रहेंगे या नहीं.
उन्होंने कहा कि हर वर्ष लाखों घर क्षतिग्रस्त या बर्बाद हो जाते हैं, परिवार विस्थापित होते हैं और निर्धनता गहराती है, जिसका सर्वाधिक असर वृद्ध आबादी, विकलांगजन, कम आय वाले परिवारों और अन्य निर्बल समूहों पर पड़ता है.
इसलिए यह ज़रूरी है कि घर-परिवार के स्तर पर ही बचाव व सुरक्षा की तैयारी शुरू की जाए. “जोखिमों को समझा जाए, योजना बनाई जाए और तेज़ी से कार्रवाई हो, जोकि जीवन व मृत्यु के बीच का अन्तर तय कर सकती है.”
यूएन प्रमुख ने इसके लिए निम्न उपायों को सुझाया है, जिसमें सरकारों व निजी सैक्टर की अहम भूमिका है.
महासचिव गुटेरेश ने ध्यान दिलाया कि जैसे-जैसे जलवायु और आपदा जोखिम बढ़ रहे हैं, सुरक्षित घरों का निर्माण करना, सरकारों, निर्माणकर्ताओं, इंजीनियर और समुदायों का साझा दायित्व है और इसके लिए संकल्प लिया जाना होगा.